क्यों नागरिक भत्ता नहीं दिया जाता !


रोशन लाल अग्रवाल

मैं देश के लोगों को केवल यह बात समझाना चाहता हूं कि आज समाज की सारी समस्याओं की जड़ अन्याय पूर्ण अर्थव्यवस्था है और न्यायपूर्ण अर्थव्यवस्था ही इसका एकमात्र सही समाधान हो सकता है।

समाज में न्याय पूर्ण अर्थव्यवस्था की स्थापना के लिए सभी प्रकार के करों को समाप्त करके केवल अति संपन्न मुट्ठी भर लोगों की संपत्ति पर ब्याज की दर से संपत्ति कर लगाया जाना चाहिए।

इसके लिए समाज में अमीरी रेखा बनाने की जरूरत है और संपत्ति कर भी केवल अमीरी रेखा से अधिक संपत्ति रखने वालों की संपत्ति पर लगाया जाना चाहिए।

मैं इस बात को भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि अमीरी रेखा से अधिक संपत्ति रखने वाले नागरिकों की संख्या अधिक से अधिक 13 लाख है और उनकी संपत्ति का मूल्य किसी भी स्थिति में 8 हजार लाख करोड़ रु. से कम नहीं है।

यदि इस पर 3% वार्षिक संपत्ति कर लगाया जाए तो इस से इतनी अधिक आए हो सकती है कि उससे सरकार के बजट का खर्च काटकर भी देश के हर नागरिक को ₹10000 प्रतिमाह जीवन भर नागरिक भत्ते के रूप में निरंतर प्रदान किए जा सकते हैं।

जहां तक इस कार्य को करने का सवाल है तो इसे करने में भी देश के नागरिक खुद ही समर्थ हैं क्योंकि देश की सत्ता में वही लोग आते हैं जिन्हें देश के मतदाता अपना वोट देकर सत्ता में बिठाते हैं और यदि देश के वोटर चाहे तो अपने वोट के अधिकार का उपयोग करके उन लोगों को आसानी से सत्ता सौंप सकते हैं जो कानून बनाकर देश के हर नागरिक को 10 हज़ार रुपए हर महीने नागरिक भत्ता देने का कानून बनाने को तैयार हो।

लेकिन कमाल की बात यह है कि अनेक लोग जो अपने आप को बुद्धिजीवी मानते हैं यह सवाल उठाते हैं कि बात तो ठीक है किंतु इसे करेगा कौन? मेरी समझ में इसका अर्थ यह है कि ऐसे लोग खुद कुछ भी नहीं करना चाहते या फिर उन्हें यह तरीका पसंद नहीं है।

चिंटू बाकी लोगों की बात छोड़ दीजिए मैं केवल उन्हें यह बात कहना चाहता हूं कि हम जो भी बदलाव करना चाहते हैं उसकी जिम्मेदारी खुद ही उठानी पड़ती है और उठाने भी चाहिए शक्तिशाली राजनेताओं के भरोसे रहना किसी भी दृष्टि से बुद्धिमानी नहीं कही जा सकती।



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