सारे साधु
संत आर एस एस और सभी हिंदूवादी संगठन यदि गोरक्षा के मामले पर वास्तव में गंभीर हैं
तो उन्हें अनुपयोगी हो चुकी गायों भैंसों और बेकार हो चुके बैलों भैंसों की समस्या
का समाधान बताना चाहिए।
यदि उनके
पास इसका तर्क सम्मत समाधान नहीं है तो इससे समस्या हल नहीं हो सकती केवल आस्था के
नाम पर समाज को नहीं चलाया जा सकता।
यह स्पष्ट
है कि अनुपयोगी हो चुके जानवरों का बोझ उठाना आम जनता के बस की बात नहीं है और इस मूल
समस्या को हल किए बिना गौ रक्षा की बात करना या गोहत्या बंद करने की बात करना परले
दर्जे की मूर्खता या मक्कारी है।
यदि गौ
रक्षक और मांसाहार को गलत मानने वाले लोग इनकी रक्षा करना ही चाहते हैं तो फिर इसके
लिए अनुपयोगी जानवरों के पालन पोषण की पूरी जिम्मेदारी सरकारों को दी जानी चाहिए लेकिन
ऐसा करने से पहले यह भी देख लेना चाहिए कि इस देश की पूरी जनता को दोनों समय का भरपेट
भोजन और आवास उपलब्ध कराना भी सरकारों के बस की बात नहीं है।
मेरा मानना
है कि देश की असली समस्या विद्वानों और विशेषज्ञों द्वारा पैदा की जा रही है और यह
सब कुछ मुट्ठी भर अति संपन्न लोगों द्वारा रचे गए षड्यंत्र के कारण हो रहा है। सारे
विद्वान और विशेषज्ञ जो कुछ बताते हैं वह 100% सत्य होना चाहिए और यदि उनकी कोई भी
बात भ्रामक या दोअर्थी हो तो उन्हें कठोर से कठोर दंड दिया जाना चाहिए।
लेकिन
अपने देश में तो हद ही हो गई है क्योंकि झूठ का सारा कारोबार देश के विश्वविद्यालय
ही संभाल रहे हैं। आप समस्या की गहराई से चिंता करें कि यदि अत्यंत विद्वान माने जाने
वाले लोग समाज को गुमराह करने के लिए झूठी रिपोर्ट प्रकाशित करेंगे तो समाज को कौन
बचाएग?
यदि आपके
मन में मानवता न्याय और विश्व शांति के प्रति कोई आस्था हो तो चिकनी चुपड़ी बातें करने
की बजाय धरती पर दिख रही सच्चाई के आधार पर समस्या का हल निकालिए। केवल आलोचना कर के
समाज को सुखी नहीं बनाया जा सकता।
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