वर्ग शोषण के भीतर: भारत पर एक संक्षिप्त दृष्टिकोण


रोशन लाल अग्रवाल


अगर आप शोषण से समाज को मुक्त करना चाहते हैं तो आपको शोषित व्यक्ति की पहचान वर्ग के आधार पर नहीं बल्कि व्यक्ति के आधार पर ही करनी होगी।

क्योंकि वर्ग के आधार पर पहचान करने से उस वर्ग का शक्तिशाली व्यक्ति ही उस वर्ग के कमजोर व्यक्तियों का खुलकर शोषण करने लगता है।

आज शोषित वर्ग के कमजोर लोग इस स्थिति को अच्छी तरह समझने और महसूस करने भी लगे है। इसलिए अब यदि एससी एसटी वर्ग की मलाईदार परत को आरक्षण के लाभ से निरंतर अलग किया जाए तो उस वर्ग के कमजोर लोगों को उसका लाभ मिलने लगेगा और वे लोग अपने वर्ग के धूर्त नेताओं के शोषण के शिकार होने से बच जाएंगे।

राजनीतिक दृष्टि से भी इससे कोई खतरा नहीं है क्योंकि अब एससी एसटी वर्ग के कमजोर लोग अपने साथ हो रहे इस शोषण को भी अच्छी तरह समझने लगे हैं और इस प्रकार के बदलाव से उनका पूरा समर्थन मिलेगा।

इस प्रकार की नीति आरक्षण को काफी न्याय संगत भी बना देगी और उस वर्ग का सबसे कमजोर व्यक्ति शोषण से मुक्त भी हो जाएगा।

इससे शोषित और वंचित वर्ग का कमजोर से कमजोर व्यक्ति भी एक दिन आरक्षण का लाभ पाकर स्वयं ही समाज की मुख्यधारा का हिस्सा बन जाएगा। पहले यह संभव नहीं था लेकिन आज यह बिल्कुल संभव है।

इसका अंतिम परिणाम यह भी हो सकता है कि एक दिन इस प्रकार के आरक्षण की जरूरत ही समाप्त हो जाए और पूरा समाज उस पर सहमत भी हो।

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